भारत सरकार ने देश के बायोटेक्नॉलजी (Biotechnology) से जुड़े अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए ₹2,000 करोड़ के BIRAC–RDI Fund 2026 की पहली राष्ट्रीय कॉल जारी कर दी है। यह फंड भारत सरकार की ₹1 लाख करोड़ के Research, Development and Innovation (RDI) Initiative का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रयोगशाला के शोध को औद्योगिक स्तर तक पहुँचाना और उच्च-प्रभाव वाले जैव-प्रौद्योगिकी नवाचारों को स्केल-अप करना है।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री Jitendra Singh ने इस घोषणा के दौरान कहा कि यह कदम भारत के विज्ञान-आधारित विकास दृष्टिकोण में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है और देश अब उभरती तकनीकों में पीछे नहीं बल्कि अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आज भारत में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में लगभग 50 से बढ़कर 11,000 से अधिक हो चुकी है, जो इस क्षेत्र की प्रगति को दर्शाता है।
🧠 RDI फंड और BIRAC का उद्देश्य
BIRAC–RDI फंड को इस तरह संरचित किया गया है कि यह लंबे समय तक चलने वाले, उच्च जोखिम वाले शोध-परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दे सके, जिन्हें प्रारंभिक पूंजी (patient capital), उन्नत बुनियादी ढांचे, और दीर्घ-कालिक निवेश की आवश्यकता होती है। इस फंड का लक्ष्य प्रयोगशाला शोध और औद्योगिक उत्पादन के बीच की खाई को पाटना है, जिससे शोध को व्यावसायिक रूप से सफल और स्केलेबल बनाया जा सके।
BIRAC के तहत इस फंड का उपयोग TRL-4 से TRL-9 स्तर की तकनीकों को समर्थन देने के लिए किया जाएगा। इसका मतलब है कि वे परियोजनाएँ जो पहले से ही प्रयोगात्मक और प्रोटोटाइप चरण से आगे बढ़ चुकी हैं, उन्हें पूंजी और संसाधन दिए जाएंगे ताकि वे वृहद रूप से लागू हो सकें।
📈 बायोइकोनॉमी में भारत की प्रगति
भारत की बायोइकोनॉमी का आकार 2012 में लगभग $28 बिलियन से बढ़कर 2024 में $165.7 बिलियन तक पहुंच चुका है, और सरकार ने 2030 तक इसे $300 बिलियन तथा 2047 तक $1 ट्रिलियन तक ले जाने के लक्ष्य घोषित किए हैं। यह वृद्धि देश को वैश्विक स्तर पर अग्रणी जैव-प्रौद्योगिकी बाजारों में स्थापित कर रही है।
🧪 प्राथमिक क्षेत्र और लाभार्थी
BIRAC–RDI Fund के तहत वित्त पोषण कई उभरते जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को मिलेगा जैसे:
- बायोफार्मास्यूटिकल और बायोइनफार्मा उत्पाद
- बायो-इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग
- बायोएनेर्जी
- ब्लू इकोनॉमी
- बायोकम्प्यूटेशन
फंड के लिए स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSMEs) और औद्योगिक साझेदारों को प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इस पहले चरण की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 है, जिसके बाद आवेदन पोर्टल बंद कर दिया जाएगा।
🚀 निष्कर्ष
भारत सरकार का यह कदम जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैज्ञानिक क्षमता, उद्यमशीलता और नीति समर्थन को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। ₹2,000 करोड़ के BIRAC–RDI Fund की राष्ट्रीय कॉल से न केवल शोध-विकास को बढ़ावा मिलेगा बल्कि यह देश को बायोटेक्नॉलजी अनुसंधान को उद्योग-स्तर पर लागू करने में भी मदद करेगा। यह पहल भविष्य में भारत को वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी बाजार में मजबूत स्थिति प्रदान करने की क्षमता रखती है, जहाँ नवाचार और वैज्ञानिक उपलब्धियाँ आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण दोनों को गति देंगी।
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